बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेन्सी

बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेन्सी

मैं कई दिनों से सोच रहा था की हिंदी में लिखता हूँ पर ऐसा कोई विषय नहीं सूझ रहा था | पिचले कई दिनों से मेरे मन में बिटकॉइन और क्रीटकर्रेंसी को लेकर जागरूकता फ़ैलाने की सोच थी पर अंग्रेजी में बहुत कुछ लिखा हुआ है और मैंने सोचा हिंदी में सायद काम लिखा गया होगा और सायद युवा लोगों  की मदद होगी। आपको यह जान कर हैरानी होगी की बिस प्रतिसत लोग इंडिया में क्रिप्टो में पैसे डाल चुके है जो की विश्व में सबसे ज़्यादा है । और इसमें ज़्यादातर लोग भारत के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र से आते है । 

पहली ही बता दूँ की इसमें में कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ बल्कि कई वर्षो से पढ़ रहा हूँ और सिखने की कोशिश कर रहा हूँ। इस लेख को भी आप सभी लोग उसी संदर्ब में देखे । अगर कोई गलती या गलतफहमी हो तो मुझे कमेटं सेक्शन में बताये और उसे मैं सुधारने की कोशिश करूँगा। तो फिर चलिए हम सब  मिल कर जानते है क्रिप्टोकरेन्सी की दुनिया।  

बिटकॉइन और उसकी शुरुआत 

बिटकॉइन ऐसा नहीं है की सबसे पहले इसी का इज़ाद हुआ, कई वर्षों या कहिये  कई दशक से रिसर्च चल रहा था जिसके कंधो पर बिटकॉइन का ईजाद हुआ। बिटकॉइन के पहले भी कुछ क्रिप्टोकोर्रेंसी विकसित किये गए। उसमे से एक था बिटगोल्ड जिसको विकसित करने वाले थे निक स्ज़ाबो जो आज भी बहुत एक्टिव है। आप लोग उनको फॉलो कर सकते है X पर और उनका एक ब्लॉग भी है जो बहुत लोग फॉलो कर सकते हैं। लेकिन बिटगोल्ड खुद पूरा अमल में नहीं आ पाया था और एक एल्गोरिदम (Algorithm) तक ही सीमित रह गया। बिटकॉइन ही एक पूरा सिस्टम बना जिसका सामान्य लोग भी उपयोग कर पाते है।

बिटकॉइन का आविष्कार करने वाले व्यक्ति का श्रेय जाता है सतोशी नाकामोतो को, लेकिन आश्चर्य की बात है आज तक यह पता नहीं है की आखिर वह कौन थे । यह भी अनुमान लगाया जाता है की सायद यह काम एक आदमी का नहीं बल्कि एक पूरी टीम का काम है जिसने अपना नाम रखा सतोशी नाकामोतो। यह सायद कभी न पता चल पाए की यह कौन लोग थे और ऐसी टेक्नोलॉजी का ओपन सोर्स (Open Source) क्यों  कर दिया। एक क्रिप्टो फोरम में पहली बार एक वाइट पेपर (White Paper) पब्लिश किया गया जो आधार बना बिटकॉइन का। पहला क्रिप्टो ट्रांसक्शन सतोशी ने हाल फिननी को 10 बिटकॉइन ट्रांसफर करके पूरा किया। हाल खुद बहुत एक्टिव थे और उन्होंने शुरुआती समय में सतोशी से ऑनलाइन बात की। यह सब 2009 की बात है। हाल की असमय 2014 में मृत्यु हो गयी ALS नमक एक बीमारी से, उनका यह आर्टिकल  आप लोग पढ़ सकते है। 

क्या यह एक क्रन्तिकारी टेक्नोलॉजी है या एक पोंज़ी स्कीम

बिटकॉइन, क्रिप्टोकोर्रेंसी , ब्लॉकचैन, विकेंद्रीकरण (decentralized), अदृढ़ (trustless) और ऐसे कई तकनीकी शब्द का उपयोग करते है जब भी इनकी बात होती है। सरल भासा मैं अगर देखा जाये तो बिटकॉइन एक ऑनलाइन मुद्रा है जिसको एक आदमी से दूसरे आदमी को कही भी दुनिया मैं भेजा जा सकता है और इसमें किसी भी सेंट्रल अथॉरिटी की ज़रुरत नहीं होती। सारे ट्रांसक्शन एक ऑनलाइन “Ledger” मैं रिकॉर्ड किये जाते है जो कोई भी देख सकता है। 

अपने देश भारत  मैं पैसे को दुगुना करने वाली बहुत सी स्कीम आती है गोल्डन फारेस्ट, एमु फार्मिंग, MLM स्कीम्स और न जाने क्या क्या। पोंज़ी स्कीम्स का मतलब होता है पहले इन्वेस्टर यानि बकरो को फ़साने अलग अलग तरीको से, पुराने इन्वेस्टर को रिटर्न्स वापिस करते रहना नए बकरे को फ़ासते हुए। यह तब तक चलता है जब तक नए लोग जुड़ते रहते है ।

बिटकॉइन को मैं जितना समझ पाया हूँ ऐसे फालतू स्कीम्स से अलग है । कहा जाता है की बिटकॉइन का कोई अंडरलाइंग एसेट नहीं है, और एक तरह से उसकी वैल्यूएशन को बढ़ाया जा रहा है। आपको जान कर हैरानी होगी की पहला कमर्शियल बिटकॉइन ट्रांसक्शन एक पिज़्ज़ा खरीदने के लिए किया गया था। इस पिज़्ज़ा को खरीदने के लिए 10000 बिटकॉइन का इस्तमाल किया गया था जिसकी कीमत उस समय मात्र 41 US डॉलर थी। आज उसी बिटकॉइन की कीमत 100 बिलियन US डॉलर है ।

इसकी सफलता के लिए क्या है सबसे बड़ा रोड़ा

राष्ट्रीय करेंसी किसी भी देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती  है । किसी भी देश की गवर्नमेंट के लिए करेंसी प्रिंट कर पाना उसके सेंट्रल बैंक निर्धारित करते  हैं  । आज कल की करेंसी का भी कोई बैकअप या कोलैटरल नहीं होता और केवल सॉवरेन गवर्नमेंट की गारंटी होती है। बिटकॉइन किसी भी गवर्नमेंट से रेगुलेट नहीं होता और अंतर्राष्ट्रीय सीमा को नहीं मानता है । इसकी वजह से बिटकॉइन का उपयोग मनी लॉन्डरिंग और अन्य आपराधिक ऑपरेशन्स मैं इस्तमाल हो सकता सकता। एक ऐसा नेवार्क है जिसका नाम है लज़ारस ग्रुप जो कहा जाता है की उत्तरी कोरिया के लिए काम करता है। अगर इसके बारे में ज़्यादा जानना चाहते है तो यह पॉडकास्ट सुनिए।   

जैसे जैसे बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकोर्रेंसी मुख्य धारा मैं आती जाएंगी उतना ही सरकारी हस्तक्षेप होगा। बिटकॉइन जैसी करेंसी को चलाने के लिए जो नेटवर्क चाहिए उसमे दखल किया जा सकता है। और भी बहुत से रोड़े है पर सरकारी विनियमन से ज़्यादा बड़ा रोड़ा और कोई नहीं है। 

 क्या AI की दुनिया में हो सकता है इसका उपयोग

आप लोग देख ही रहे होंगे की AI किस तरह से फ़ैल रहा है। AI के चिप्स बेचने वाली कंपनी NVIDIA आज 4 ट्रिलियन US डॉलर की वैल्यूएशन पर पहुंच गयी है। और ऐसा कहा जाता है बहुत सारे काम AI एजेंट्स करने लगेंगे । एजेंट्स एक दूसरे से बात करेंगे और काम होने पर पैसे का लेन-देन भी कर सकते है और ऐसा होने पर बिटकॉइन या कोई अन्य क्रीटकर्रेंसी का उपयोग कर सकते है। इसका यह मतलब है की आप दुनिया  मैं किसी कोने से काम कर सकते है और आपको पैसे क्रिप्टोकररेंटेंसी के द्वारा भेजा जा सकता है ।

 

क्यों है इसके बारे में जानना  सबके लिए ज़रूरी

मेरे हिसाब से अगर आप बिटकॉइन या किसी भी और क्रिप्टोकोर्रेंसी को पैसे दुगुना या कई गुना करने का स्कीम न समझे । पहले इसको समझने की कोशिश करे । भारत मैं आज बहुत से लोगों ने पैसा लगाया है लेकिन इसके रिस्क को समझे । आज बिटकॉइन या क्रिप्टोकोर्रेंसी पर सबसे ज़्यादा टैक्स है हमारे देश  में  । आने वाले समय में सरकार कैसे रेगुलेशन लाएगी उसकी क्लैरिटी भी नहीं है । जो भी प्लेटफार्म इंडिया मैं है वह कितने दिन चलेंगे उसकी भी गारंटी नहीं है। अगर आप चाहें तो कुछ एक्सपोज़र ले सकते है पर रिस्क और वोलैटिलिटी को समझे। 

पर इसको सीखना ज़रूरी है, यह कैसे काम करता है और क्या विकल्प है उसे समझिये । यह मेरी रिकमेन्डेशन है । 

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